Friday, 31 July 2026

niyam

 नियम तो नियम है नियमों का क्या?  


नियम तो नियम है इनके लिये सोचना क्या ये तो हैं ही टूटने के लिये। बनते हैं टूटते हैं बनते हैं टूटते हैं और नियम बनते हैं किस के लिये। उस से सम्बन्धित सभी कर्मचारी, पुलिस, अधिकारी सबकी पीढ़ियाँ तर जाती हैं। जब जेब ढीली पड़ जाती है तब नियम की याद आ जाती है कि चलो नियम ढीले पड़ गये हैं कसा जाय जेब भी टाइट चल रही है।

पॉलिथिन बंद... हल्ला, होहल्ला गाय मरती है, नाले चोक होते हैं मिट्टी खराब होती है लेकिन मिट्टी खराब हो जाती है छोटे दुकानदारों की, ठेले वालों की एकदम से थैलियाँ जब्त, साथा ही फाइन। लाला चल अब कुछ दिन मौज कर अब अगली बार तुझ पर हाथ नहीं डालेंगे। और ठेले वाला धड़ल्ले से फिर थैलियाँ देता है सबकी जेब भी भर जाती है और पॉलिथिन अभियान खत्म।

दूसरे विभाग का अभियान चालू होता है । जब जिस चौराहे पर याद आती है और उसमें भी देखते हैं ,कौन मरगिल्ला पिद्दी सा है। सूट बूट वाले या दबंग से शान से बिना हैलमेट चलते हैं और उसकी बगल का टूटा सा स्कूटर  चलाने वाला पकड़ में आता है  जेब में पैसे नहीं हैं बेटा  घर जा बेटा पैसे  जा चाहे सिर फोड़ या टांग कटा।स्वयं पुलिस वाले कभी हैलमैट लगाये नहीं दिखेंगे उनका चालान भी कभी नहीं होता । नेताओं के बच्चे तो खुदा ही समझने लगते हैं और सारे नियम ताक पर रखते हैं पर सत्ता से बाप हटा और सारे अपराध खुदने लगते हैं अगर विरोधी पार्टी हो तो खुदाई गहरी हो जाती है।

नियम बना 10 बजे तक बैंडबाजा बरात का मोहल्लो के बरातघर बंद शोर से ट्रैफिक से जनता है परेशान हैरान जिसकी लाठी उसकी भैंस जो दबंग है 12 बजे तक शोर मचाये, बाजे बजाये, गोली दागे पटाखे चलाये बम फोड़े।जनता के कान फूटे, बीमार मरे दिल के मरीज की धड़कन बंद हो तो क्या फर्क पड़ता है शादी तो एक दिन होनी है मुहल्ले के कान तो रोज फूटते है सुबह 4 बजे ढोल नगाड़े से शुरू हो जाता है। बाबुल की दुआएं अब चाहे बाबुल कितना ही सुखी संसार के लिये दुआ देगा पर मुहल्ले का मुहल्ला बददुआ देगा जैसे तूने हमारी नींद उड़ाई भगवान तुम्हारी नींद उड़ाए जैसे तुमने हमे उठाये रखा है भगवान तुम सबको उठाये। अब शादी में नियम तो है कि जब तक पूरे जोश से पीपनी ( शहनाई)पर धुन न गाई बजाई जाय शादी शादी न मानी जाती।




डा॰ श्शश्शि गोयल                         





Wednesday, 29 July 2026

kaviyon se khed sahit

 कवियों से क्षमा सहित खेद रहित

नाच हो या गाना , खाना हो या पीना हो सर्र से कवियों पर चिट्ठी पहुंच जायेगी फलां दिन कवि सम्मेलन है आप सादर आमंत्रित हैं,और कुछ नखरे से कुछ अखरे से कुछ बकरे से मंच पर हाजिर होते हैं और बैठे होते हैं जनता के यथार्थवादी भुक्तभोगी लोग, जिनकी जेबों में भी कुछ टीपी कुछ लीपी कविताऐं होती हैं कि अवसर मिले तो थोड़ा सा बदला कवियों से वो भी लेलें कि तुमको इतनी देर मैंने झेला अब तुम भी झेलो।

यहां कवि सम्मेलन में उठती आवाजें एक भी मेरी नहीं है हां जो जो शब्द कानों में पड़े वो ही हैं इसलिये सभी आदरणीय कवियों से क्षमा चाहते हुए जनता जनार्दन की आवाज सुना रही हंू

कल तक तो यहीं था

मेरा घर कहां गया (रमेश गौड़)

अवैध निर्माण होगा कॉरपोरेशन वाले उठा ले गये होंगे

कितना जिया कितना मरा

यह सवाल खुद से पूछा ( रमानाथ अवस्थी)

डाक्टर की फीस देदेते वही बता देता न देते तो पूरा मर जाते

एक ने वाह भरी पीछे से आवाज आई क्यों बजा रहा है साले दोबारा सुना देगा जल्दी निपटने दे।,तो दूसरा बोला जब खुद से ही पूछ रहा है तो हमें क्यों सुना रिया है , नींद में बोलने की बीमारी है क्या?

स्वतंत्रता मंगलमय हो 

           गोपाल प्रसाद व्यास

अमंगल तुम्हारे लिये होगा नेताओं का तो मंगल ही मंगल है जनता तो फ्राई है

सुमति सुरक्षा

कोई और कठिन शब्द नहीं मिला डिक्शनरी में

डाकिये ने द्वार खटख्टाया

अनबांचा पत्र लौट आया (माया गोविंद)

आगे से पूरा टिकिट लगाना नहीं लौटेगा 

भवानी मिश्र जी ने शुरू किया ,मै गीत बेचता हूं, जी हां हजूर मैं गीत बेचता हूं

‘ नीचे उतर कर आओ एक ही गीत कब से  बेच रहे हो हिसाब दो बिक्री कर दिया या नहीं।’

‘प्रार्थना मत कर मत कर मतकर( हरिवंश राय बच्चन)

तुम क्यों करोगे प्रार्थना मजे आ रहे हैं प्रार्थना तो हम कर रहे हैं जो सुने जा रहे हैं।

‘ मेरी मां ने पिल्ला पाला’ अभी कवि ने शुरू ही किया था पीछे से आवाज आई

‘और मंच पर छोड़ दिया’

अभी इतना ही ,कवि सम्मेलन तो होते रहते हैं आवाजें आती रहती हैं ये तो एक यादगार कवि सम्मेलन था ।





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