Wednesday, 13 January 2016

मोल भाव

हल्की हल्की सुनहरी रोशनियों से हाल रोशन हो रहा था। स्टेज पर गायक गाना गा रहा था।

क्या मंगाया जाये?

‘‘पांच सितारा होटल मे मेन्यू कार्ड उलटते पलटते सुभाष बोले।दाल मखनी‘‘ उत्साह से नमन बोला ‘‘धत्अभी कल ही तो घर मे बनी थी कुक बहुत बच्छी बना लेता है ‘‘ कनिका ने बच्चां से कहा।


षिट मम्मा फिर आप कहोगी मलाई कोफ्ता परसों बने थे अब यही सब मिलता है होटलां मं एक नान वेज मगा लीजिये,पापा टंगडी कबाब मंगा लीजिये‘‘ अनन्या ने मैन्यू कार्ड बन्द कर के कहा।अच्छा पापा मेरे लिऐ सिजलर मंगा दीजिये‘‘ नमन बार बार ऊपर नीचे उलट पुलट कर मैन्यू कार्ड देख रहा था।


कुछ नया दिख ही नही रहा था।

खाना खाने के साथ ही सुभाष को लगा जोर की अंगडाई लं पर रोक लिया ,यह कोई घर है यहा  सभ्यता से बैठना पढ़ता है। बिल देखा 2375 रू0 का था। पांच पांच सौ के नोट रख उठ दिये। 


अदब से वेटर ने पीछे से कुर्सी हटाई और सलाम मारा उसे सवा सौ रूपये मिल गये थे। एक सलाम तो बनता है। टूथपिक से दांतो को कुरेदते चल दिये। पचास का नोट दरबान के सलाम मारने पर पकड़ाया एक गर्व का सा भाव चेहरे पर उतर आया। होंडा सिटी कार निकाल सब चल दिये।


कुछ आगे चलते ही देखा पेड़ के नीचे एक सब्जी का ठेला खडा है अरे रोकना कनिका बोली सुबह के लिऐ सब्जी लेलूँ इस समय सस्ती मिल जायेगी‘‘

पापा‘‘‘‘‘‘‘‘‘ आइसक्रीम भी खानी है बच्चे बोले‘‘‘‘‘‘‘‘‘

चलो तुम लोग आइसक्रिम पार्लर से जो भी आइसक्रीम लेनी है लो हम सब्जी ले लेते हं‘‘

कनिका ने सब्जी वाले से आलू लिये गोभी ली, टमाटर लिये‘‘‘‘‘‘ टमाटर आधा किलो से ज्यादा बचे थे अबे  आधाकिलो में सब तौल दे ,’कहकर सारे टमाटर थैली में डाल  लिये एक सौ दस रूपये बन, सौ का नोट दिया तो सब्जी वाला बोला,‘ साहब दस रूपये‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘ ‘ अबे‘‘‘‘‘‘‘चल इतने भी कम नही करेगा अब तो सडे़गी तेरी सब्जी धनिया मिर्च और डालकहकर ष्षान से थैली लेकर बढ गये सब्जी बाला निराषा से देखता रहा।


वही दस रूपये तो उसे बचने थे पर हा  गोभी सुबह तक बासी हो जाती उसे और सस्ते मं बेचनी पडती। एक गहरी सांस ले उसने गल्ला समेटना षुरू कर दिया ग्यारह बज गये थे अब घर जाकर खाना खाले भूख लगी थी।


सुभाष कनिका खुष थे जो गोभी दिन मं 80 रू0 किलो मिल रही थी वह उन्हे पचास रूपये मं मिल गई साला दस रूपये मांग रहा था‘‘‘‘‘‘‘‘‘ ‘‘ दस रूपये बचने से मगन थे। अच्छा सौदा रहा ।मैंने कहा था

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