Wednesday, 16 December 2015

खेल और खिलाड़ी भाग 3

अभी थोड़ी देर ही हमें बैठे हुए थे कि दो आधुनिक महिलाएं आयी और बोली माफ कीजियेगा आपका स्वेटर की बुनाई बहुत सुन्दर है। हम मन ही मन फुल कर कुप्पा हो गये और इससे पहिले कि हम उन्हें माफ कर पाये एक ने आगे से दूसरे पीछे से हमारे स्वेटर केा खींचना शुरू कर दिया।घबराकर हमने स्वेटर ही उन्हें यह कर कर उतार दिया कि धूप अच्छी है स्वेटर की खास आवश्यकता नहीं है।



उस दिन के खेल के जमने का यह हाल था कि फटाफट खिलाड़ी आउट हो रहे थे और खुशी में खटाखट कुर्सियां टूट रही थीं। एक बुड्डे दाढ़ीवाले सज्जन बेसाख्ता सीट पर उछल कूद कर रहे थे कि सामने सीट पर बैठी एक महिला ने एक फुट जुड़े से लगी फैशनबुल कंघी में उनकी दाढ़ी जा उलझी।



 जैसे ही उछले फटाक से उनकी ठोढ़ी महिला के सिर से टकरायी। उधर वे दम के गोले की तरह फटी बुड्डे हो गये पर शरम लिजाज नहीं। मियांजी महिला को देखते जाते और एक हाथ में दाढ़ी सहलाते जा रहे थे।



खिलाड़ी के गेंद फेंकने के स्टाइल में एक ने काल्पनिक गेंद फेंकी और उस गेंद का घूंसा पास बैठे सज्जन की उड्ढी के विकेट से टकराया फिर क्यावही दोनों में कुश्ती जम गयी। थोड़ी सी जनता बिना टिकट उस कुश्ती को भी देखने जा पहुंची।


एक सज्जन चाय वाले से चाये ले रहे थे उसी समय आस्ट्रेलिया की टीम का एक खिलाड़ी आउट हुआ वे सज्जन चाय भूल जो ताली बजाने लगे कि चाय पर जोर से हाथ पड़ा।

आधी चाय उनके बढ़े दूसरे हाथ पर और बाकी आस पास बैठे सज्जनों पर पड़ी। चाय की प्याली ने जो उछाल मारी तो वह पहुंची हाथ उठाकर हो हो कर रहे एक सज्जन की उगलियों पर और तश्तरी पहूँची उनके दो तीन सीट आगे बैठी एक महिला के घोंसले पर।


हम क्रिकेट से ज्यादा इन नजारों का आनन्द उठा रहे थे कि एकाएक हमको स्वेटर का ध्यान आया वह भी इसलिये क्योंकि चाय वाले काण्ड ने एक सज्जन को बड़बड़ाते हुए अपना स्वेटर उतारने पर मजबूर कर दिया था। हम लपक कर उधर बढ़े जहां वे दोनों महिलाऐं बैठी थी। जल्दी में एक सज्जन की टीम से टकराकर एक पटकनी खायी।



उनके बताये स्थान पर देखा तो वे महिलाएं नरारद। आधा घंटे तक न क्रिकेट न मैदान बस श्रीमती जी या स्वेटर ही ध्यान में आता रहा। अन्त में लटकाए मुंह घर को चल दिये पर दिल जोर जोर धकड़ रहा था कि श्रीमती जी को स्वेटर क लिय क्या जबाब देंगे ?

खेल और खिलाड़ी
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