Wednesday, 16 December 2015

ये पर्दानशी आंखे का पिछला भाग

ये पर्दानशी आंखे का पिछला भाग
नियम तो नियम है इनके लिए सोचना क्या ये तो है ही टूटने के लिये। बनते है टूटते है बनते है टूटते है और नियम बनते है किस के लिये ? टूटने के लिय न! जिस विभाग में नियम बनते है उस से सम्बन्धित सभी कर्मचारी, पुलिस, अधिकारी, सबकी पीढि़याँ तर जाती है।


जब जेब ढीली पड़ जाती है तब नियम की याद आ जाती है कि चलो नियम ढीले पड़ गये है कसा जाय जेब भी टाइट चल रही है।


पाॅलिथिन बंद हल्ला हाहेल्ला, गाय मरी है, नाले चैक होते है मिट्टी खराब होती है लेकिन मिट्टी खराब हो जाती है छोटे दुकानदारों की, ठेले वालो की एकदम से थैलियाँ जब्त, साथ ही फाइन। लाला चल अब कुछ दिन मौज कर अब अगली बार तुझ पर हाथ नहीं डालेंगे और ठेले वाला धड़ल्ले से फिर थैलियाँ देता है सबकी जेब भी भर जाती है और पाॅलिथिन अभियान खत्म।


दूसरे विभाग का अभियान चालू होता है जब जिस चैराहे पर याद आती है और उसमें भी देखते है कौन मरगिल्ला पिद्दी सा है। सूट बूट वाले या दबंग से शान से बिना हैलमेट चलते है। और उसकी बगल का स्कूटर मांग कर लाकर चलने वाला पकड़ में आता है और, धर जा बेटा पैसे फिर जा चाहे सिर फोड़ या टांग कटा।



नियम बना 10 बजे तक बैंडबाजा बरात का मोहल्लों के बरातघर बंद शोर से ट्रैफिक से जनता है परेशान हैरान जिसकी लाठी उसकी भैंस जो दबंग है 12 बजे तक शोर बचाये, बाजे बजाये, गोली दागे पटाखे चलाये बम फोड़े।



जनता के कान फूटे, बीमार मरे दिल के मरीज की धड़कन बंद हो तो क्या फर्क पड़ता है शादी तो एक दिन होनी है मुहल्ले के कान तो रोज फूटते है सुबह 4 बजे ढोल नगाड़े से शुरू हो जाता है बाबुल की दुआएं अब चाहे बाबुल कितना नींद उड़ाए।



जैसे तुमने हमें उठाये रखा है भगवान तुम सबको उठाये। अब शादी में नियम है कि जब तक पूरे जोश से ढोल नगाड़े न बजाए जाय शादी शादी न मानी जाय तो वो तो बजेंगे नियमों का क्या। http://ulatpalat.blogspot.com/2015/12/blog-post_15.html
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