Friday, 18 December 2015

और कितना गिरोगे

गिरने का दौर जारी है । रोज रिकाॅर्ड टूट रहे हैं ,गिरने के रेकार्ड तो होते ही हैं टूटने के लिए ,अब चिंता रोज रोज रिकाॅर्ड टूटने की है ,तो रिकाॅर्ड ही नहीं उसे बिलकुल शून्य पर पहुंचा दो।

अब लो कर लो बात ,रुपये को गिरा हुआ क्यों बता रहे हो ?

यहां तो हर बात मर्जी पर चलती है । बोलने पर चलती है ,अगर नेता कह रहे हैं मंहगाई गिर रही है तो गिर रही है ,उसे उठी कैसे मान लोगे ? रही रुपये की बात तो गिर कहां रहा हैं ? ऊपर उठ रहा है ,गिर तो डालर रहा है ।हम तो ऊपर जा रहे हैं । जनता को समझना चाहिए हम रिकाॅर्ड स्टार पर चमक रहे हैं वह एक और हम चैंसठ, हमारी संख्या ज्यादा हुई न।


अब नेता समझायेंगे, पर्यटन बढ़ रहा है ,विदेशियों को भारत अब सस्ता लग रहा है ,है न बल्ले बल्ले तो उठाना हुआ न, नेता संसद में उठ रहे हैं । मुक्के लहराते हैं तो कितनी टी आर पी ,टी वी की बढ़ रही है । मुफ्त का तमाशा देश विदेश को मिल रहा है।कितना उठ गए हैं हम, नई नई गालियाँ ,आरोप प्रत्यारोप लगा कर बोलने की क्षमता उठ रही हैैं।

पहले कथा कहानियों में ,अखबार में, फिल्मों में हम आदर्श पाते थे और अपने गिरने का दुख होता था। हम भी ऐसे बनेंगे, अब हमारा कितना मनोबल उठ गया हैं की हीरो से ,नेताओं से ,नायक से गालियां सुनते हैं और सुनाने वाला अपना काॅलर ऊँचा करता है, वह देश का हीरो है।

नेता प्रसन्न है उसने विरोधी को चुन चुन कर सुनाई हैं कि भला आदमी मुॅह से बोल भी नहीं पाये। हर कोई नापता है कितना गरियाए । भाषण का स्तर उठ गया । महिलाएं कितना उठ गई हैं दुर्गाबाई, लक्ष्मीबाई, अहिल्या बाई  से मुन्नीबाई, चमेलीबाई बन गई हैं ।छम्मक छल्लो कहलवाने पर खुश हैं ।
छल्ले सी ड्रेस पहन कर इठलाती हैं और हम कह रहे हैं गिर रहा हैं स्कर्ट उठ रहा है ,टाॅप उठ रहा है । सब कुछ उठ रहा है ,हमारी बेईमानी का स्तर उठ रहा है । गिर रहा है तो देश गिर रहा है । हमारी संस्कृति गिर रही हैं। हमारा ईमान, हमारा चरित्र गिर रहा है ,पर इससे कुछ होता नहीं हैं इसके गिर कर हमारा बैंक वैलेंस उठ रहा हैं अब बस इंतजार है तो


तुमने कुचले हैं मिट्टी के घरौंदे,

कितने सपनों को उसके नीचे दबाया होगा।


कोई कथित कीड़ा ही दफन मिट्टी से,

पाके मिट्टी की ताकत सरमाया होगा।
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