Friday, 18 December 2015

लहर

भारत में हर चीज की लहर आती हैं जैसे सागर में लहर तट की और दौड़ती है फिर दूसरी लहर तट की ओर आती है ,एक के बाद एक लहर आती जाती है। मनोरंजन से प्रारम्भ करे तो सिनेमा मैं आजकल एक से एक भद्दी गालियां बकी जा रही हैं ।बताया जाता है दूसरी भाषा मैं मतलब शुद्ध है वह भी लड़कियो के मुँह से तो टी आर पी बहुत बढ़ेगी लड़कियाँ कोई लड़कों से कम हैं।


वो तो अब हर मामले में उनसे आगे हैं । जितनी ज्यादा गाली उतनी ज्यादा सीटी ,अब थर्ड क्लास में सीटी न बजे तब तक सिनेमा क्या ? और चलेगा भी कैसे ? फिल्म नगरी बंद करानी हैं क्या उपदेश सुनने तो जा नहीं रहे।थर्ड क्लास सब श्रेय ले जाये यह कैसे हो सकता है।


अपर क्लास कोई सीटी बजाने में कम है । गाली देने और लिखने वालों को हम सम्मान देते हैं । उन्हें बड़े सम्मानों से लाद देते हैं ।जब भटियारे लड़ते हैं तब ऐसी गाालियाॅं सुनने को मिलती है ।
लहर गाने की आती है ,चमेली बाई चली तो एक से एक फूहड़ बाईयां आ गई ,मुन्नीबाई और भी जितनी बाईयां हैं सब मटकने लगीं और बारातों की जान बन गई । एक धाय धू का गाना आया तो कान फट गए सभी पटाके फोड़ रहे हैं।


साहित्य में लहर आयेगी विमर्शों की कभी दलित आएंगे तो कभी स्त्री मतलब ये बेचाारे हैं । क्यों बेचारे हैं यह अलग बात है। तो उसमें भी जो जितना गन्दा लिख सकता है लिख कर नाम कमा रहे हैं । बहुत वेबाक लिखा?है। अच्छा है । सब खोल कर रख दिया है।


कवितायें आजकल बेटियों पर हैं, कल तक माँ ही माँ थी ,अब भू्रण हत्या है तो कल बहू आजायेगी ,क्योंकि बेटी ही बहू बनती है ,पर बहू बनते ही मुँह बिगाड़ खलनायिका बन जाती है । आजकल तो बहू हर सीरियल में रो रही है और बेटिया माँ के साथ मिल कुचक्र रच रही हैं।

आंसुओं की धार बंध जाएगी पर क्या मजाल रुमाल की जरूरत पड़ जाये । यहाॅं तो आॅंख पीछे भरेगी नाक  पहले दौड़ेगी

आॅंखें दोनों बह रहीं भीगे आंसू से गाल
तुरत नाक बोली नहीं मैं भी हॅूं कंगाल।


भगवान जी की लहर चल जाती है कभी हनुमान जी ,कभी देवी जी ,कभी शनि महाराज और आजकल सांईबाबा के अब पीछे पड़े हैं । कुछ तथा कथित संत परेशान है सब मलाई साई बाबा के रखवाले खा रहे हैं उन्हें कोई पूछ ही नहीं रहा है ।

सांई को ही क्यों  पूजे जा रहे हैं । सांई बाबा ऊपर नौ-नौ आंसू रो रहे होंगे । कभी धन को हाथ नहीं लगाया ,बांटा ही बांटा,अब सब रिश्वत दे रहे हैं। सोने के सिंहासन पर बैठा रहे हैं ।


एक वक्त संतोषी माता का  आया था अब कहाँ है पता नहीं ? लहर तो आनी जानी है कब आ जाय कब लौटे जायं भगवान करे आपकी । अरे! बाप रे अब आपकी कहने से गलत समझेागे मुश्किल तो अब राधे राधे बोलने में हो गई है । राधे का ध्यान धरो लााल पोशाक  सामने आ जाती है ।
पूरे अक्तूबर माह में कोशिश कर बापू मुॅह से नहीं निकाला, तुम सबकी ऐसे ही लहर चले और निकल पड़े।
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