89अपनो गाँव ले ओ नंदरानी हम कहूँ अंत बसेगें जाय
सूनी बाथर खोल किबरिया यह भीतर घुस जाय
छोकें पेसे जाने माखन खायो दूध दियो ढरकाय अपनो
हम दधि वेचन जात वृन्दावन मारग रोको आय
तिहारे घर छोटो सो लगे वहाँ हाल बड़ो है जाय अपनो
वृन्दावन की कुंज गलिन में ऐसो रास रचाय
दो दो गोपी बिच बिच माधव शोभा वरन न जाय अपनो
अपनो हाथ छुड़ाय गयो देकर को कर पकड़ाय
चन्द्र सखी भज वाल श्याम छवि बार बार बलिहार अपनो
90अजब है सखी श्याम वाली बंासुरिया
में निरगुन भरी ये निराली बासुरिया
जो बरसा दिये सुर सुमन त्रिभुवन में
जब होठों से प्रभु ने लगाली वासुरिया
बजाते हैं ऐसी कुजंन वन में मोहन
ने ऐसी सुनी देखी माली वासुरिया
बसी मेरे नमनों में मन में समाई
वह काली कमलिया निराली बसुरिया
, किये माँगने पर हजारो बहाने
इसी से तो हमने चुराली बसुरिया
न भूलेगी मुझको उमर भर सखीरी
सुनी है जो गोविन्द वाली बसुरिया
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मुरली वाले पर हो जा मतवाला रे भज राधे श्याम
बृज बल्लभ के धाम में भ्रमत करे गंुजार
दुलहिन प्यारी राधिका दूल्हे नन्द कुमार
युगल जोड़ी पर जाऊँ बलिहारा रे भज राधे श्याम
वा वृन्दावन में बसे मुरली वाला श्याम
मुरली में गावे सदा श्री राधा श्याम
बाकी बढ की छाहं में बैठ जपू हर नाम
इत उत कुजन में फिरू खोजत श्यामा श्याम
सावरी सूरत पर जाऊँ बलिहारा रे भज राधे श्याम
मेरे प्यारे सॉवरे जहाँ चराई धेनु
बा ब्रज वल्लभ धाम की तन लपटाऊ रेनु
वहे यमुना की धार अपारा रे भज राधे श्याम
92सखी यह बात जमुना के तीर की रह
जमुना किनारे श्याम वंशी बजावे मैं जानू वंशी करील कीरी
जमुना किनारे श्याम गऊये चरावे मै जानू गऊये अहीर की री
जमुना किनारे श्याम धूनी रमाये में जानू धूनी फकीर की री
जमुना किनारे श्याम रास रचाये मैं जानू छोरी अहीर की री
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मेरो राम मिलन कैसे होय गली तो चारो बन्द पड़ी
चार गली है चारांे बन्द है कौन गली से जाऊँ
एक तो चारो बन्द पड़ी मेरो राम
पहली गली है दया धरम की दूजी गली है दान
तीजी गली है हरि सुमरन की चौथी मे साधु सम्मान
गली तो ...................
हरि सुमरन में मन नही लागे दान दिया न जाय
दया धरम देखे डर लागे साधू का किया अपमान
गली तो चारो.........................
आग लगे डाका पड़े चोर मोर लै जाय
यह अधर्म तो सहे जात है दान दिया न जाय
गली तो चारो...................
चारो ही पन ऐसे ही बीते जैसे सूकर श्वान
जब जाओगे यम के द्वारे कहा बताओगे राम
गली तो .................................
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95धनुष धारी पर होजा मतवाला रे भज सीताराम
ठोकर खाई बहुत सी झूठ जगत व्यवहार
सीता पति मैं इसीलये आया तेरे द्वार
मुझे दर दर नही भटकना रे भज......
नृप दशरथ के महल में जनम लिया सरकार
कौशल पति प्रभु प्रगट भये तीन लोक करतार
खेलत चारो सुकमारा रे भज
फूल लेन बगिया गये दशरथ राजकुमार
राम धनुष जब तोड़ दिया सिय डाली जयमाल
जहाँ मिल गये चन्द्र चकोरा रे मज...................
सीय स्वयंवर में जुड़ी भीड़ भूप दरबार
राम धनुष जब तोड़ दिया सिय डाली जयमाला
युगल जोड़ी पर जाऊॅं बलिहारा रे मज ................
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96जय जय सुर नायक जन सुख दायक प्रणत पाल भगवंता
गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिन्धु सुता प्रिय कंता
पालन सुर धरनी अद्भुत् करनी मर्म न जानय कोई
जो सहज कृपाला दीन दयाला करहु अनुग्रह सोई
जय जय अविनाशी सब घट वासी व्यापक परमा नन्दा
अविगत गोतीतं चरित पुनीतम माया रहित मुकुन्दा
जोहि लागि विरागी अति अनुरागी विगत मोही मुनि वृन्दा
निशि वासर ध्यावहि गुनगन गावहि जयति सो श्रद्धा नन्दा
जेहि सृष्टि उपाई त्रिविध बनाई संग सहाय न दूजा
सो करहुं अधारी चिन्त हमारी जानहि भगति न पूजा
सो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गजंन विपति वरूथा
मन बचि क्रम वानी छाड़ि सयानी सरल सकल सूर यूथा
शारद श्रु्रति शेषा ऋिषिय अश्ेाषा जा कहु कोई नही जाना
जेहि दीन पियारे वेद पुकारे द्रवहु सो श्री भगवाना
भव वारिध मन्दिर सब विधि सुन्दर गुण मन्दिर सुख पुंजा
मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पद कंजा
जानि समय सुर ऋषि मुनि सकल समेत सनेह
गगन गिरा गभीर भई हरहु शोक सन्देह ☺