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सबसे अधिक सबको दुःखी करता है कि मेरे पास किसी और पड़ोसन की कोई चटपटी खबर नहीं होती यद्यपि हर दिन कोई न कोई पड़ोसन दूसरी पड़ोसन की खबर सुना जाती है। मैं भी ‘हाय दैया! ऐसा, कहती सुनती हूँ, अच्छा मैंने तो नहीं सुना। ’
बूट दसों ने बनाया, मैंने एक मजमून लिखा।मुल्क में मजमून न फैला, और जूता चल गया।
जूता चप्पल टमाटर अंडे छुटभैये नेता ,गायक, सबसे ज्यादा कवि अपने प्रदर्शन से बटोरते रहे है । पर पहला जूता फ़ेकने का असली श्रेय उसी अमरीकी पत्रकार को जाता है जिसने बुश पर जूता फेंकने की बहादुरी की । उसके बाद तो जूता फेकना प्रचलन में आ गया जुगाड़ है
जिंदगीगरीबी की आड़ है जिंदगी
कर कर मर जाओमरना भी जुगाड़ है जिंदगी
यह तो अपनी अपनी भूख की बात है। तब आप घी तो मंगाना भूल ही जायेगी तो मोटापा अपने आप कम होगा क्योंकि अपने एक मराठे पर दस पराठों का आप बलिदान देना नही चाहेगी और आप रूखी रोटी ही बनवायेंगी।
यह सब मिलकर आपके शरीर पर एकदम असर करेंगे। अगर आप कोठी मेें रहती हैं तो या मकान में ही जहां आप होगी आप को जब भी जरूरत होगी नौकर को दूसरे छोर पर पायेंगी। चीखने में तो पूरा दम लगता ही है और यदि बुलाने जायेंगी तो बार बार चक्कर लगाने पड़ेंगे जिससे कि आप की अच्छी खासी कसरत हो जायेगी।
घर में किसी से कह भी नहीं सकती कि छटी की पढ़ाई पढ़ाने में असमर्थ हूँ। सब मेरी पी.एच.डी. की डिगरी छीनने को तैयार हो जायेंगे, या कहेंगे न पढ़ाने के बहाने है। बताओ छटी और चैथी को नहीं पढ़ा पा रही हैं। चुपचाप ध्यान लगाकर अल्पी और वेबू की पुस्तकों का अध्ययन मनन करती हूँ
डालकर पर्दा न जाने क्या छिपाती है ?चीर कर पर्दा किसी पर कहर ढाती है,
इन पर्दानशी आंखों में कैसा जादू है
डाल दी नजरें तो सासें थम सी जाती है।
काला चश्मा और सफेद कपडे अब नेता की पहचान बन गये हैं जितना बड़ा नेता उतने सफेद कपड़े और उतना गहरा काला चश्मा। किसी से नजर न मिले और उनकी नजर सबके हावभाव देखती रहे।
दाह संस्कार और मृत्यु, विमान उठने के समय चश्मा न पहना तो सेलीब्रेटी क्या ?अलग लगना चाहिये ।
कि अगर उनका भाई या मायके की तरफ का कोई आ जाय तब इनकी अमीरी देखिए, अच्छे-अच्छे लखपतियों के घर का खाना लजा जायेगा। उन दिनों पत्रिकाओं से विशेष अच्छी-अच्छी व्यंजन विधियां निकालती हैं, और जितने दिन भी कोई रहता है सिर में किसी के दर्द तक नहीं होता है।
तो ठुमुक कर बोली, मेरी वो नीली वाली साड़ी है न वह फट गयी है ,पर उसमें लगी फाल साबुत है । सोच रही हूँ फाल बेकार जायेगा, इसलिए एक दूसरी नीली साड़ी ले डालूँ काम आ जायेगी।’ है न जबरदस्त मितव्ययता।
अब मैं जल्दी से लिखना समाप्त करता हूँ। डर है कहीं इधर उधर से आकर देख न लें और यह कहकर फाड़ न दे कि क्यों बेकार कलम घिस रहे हो। टिकट के पैसे भी बेकार जायेंगे। क्योंकि उनके लिए हमारा सब लिखना बेकार ही तो है ,और उसे बचेकर रद्दी के पेैसे वसूल करती हैं।
आज के युग में रही होती तो किसी से कहने की तो बहुत भलाई सीधे जीन्स पहनकर बाॅबकट बाल और बगल में लटकते थैले में पितृघर से हविष्यान्न बटोर कर कहती पाॅप थोड़ा और भेज देना शैवी के सब फ्रेंडस् भी हैं। उन्हें कहाँ फुरसत है
आउट आफ डेट है माताजी पिताजी क्योंकि अब वे ममी मृत मसालों से सुरक्षित लाश है। यह नियति है इस से ज्यादा उनका आस्तित्व नहीं और पिता भी उनके सामने जीवित होते हुए डैड हैं।
राजदरबार का कुत्ता भी यानी राजनीति में चस्पा हर आदमी का बैंक वैंलेंस तो बस होता ही कई शून्यों में है। फिर जितने ज्यादा सफेद बाल उतनी कन्याओं की चांदी क्योंकि जल्दी पार लग जायेगा।
एक तरफ इंसान कहेगा भगवान तेरी पूजा करूँगा ,मुझ काम दे दो,मान दे दो ,धाम दे दो।
दो यार लड़ाई के मैदान में मिले, बहुत पुराने दोस्त थे एक पूरब का तो दूसरा पश्चिम का। दोनों गले लगे फिर एक बोला, ‘भाई तू क्यों सिपाही बना है ?’वह बेचारगी से बोला, ‘ क्या करूं शादी वादी हुई नहीं, न जोरू न जाता, अल्लाह मियां से नाता, सोचा चलो जौहर दिखाने के लिये बीबी नही है तो यहीं दिखा दें ,पर भाई तू अपनी सुना ,तू क्यों आया ?’
‘मेरी शादी हो गई इसलिये आया भाई।’मतलब शादी वो लड्डू है जो खाये तो पछताये ना खाये तो पछताये, यानि बीबी तो लड्डू है ही अब जो कुछ भी गलती है तो वो इन बेचारे पतियों की है। अब यह भाई बेचारा कहकर किसकी सहानुभूति बटोरना चाहते हैं ? या तो जो इनके जैसे बेचारे हैं वो या वो जो इन्हें देख कर बेचारा बनने को बेचैन हैं, और जब ये बेचारे वेदी पर बैठने की तैयारी करते हैं तो उनसे कुछ भी करालो। उस समय यदि कोई पूंछ लगाकर सड़क पर भागने के लिये कहे तो भी तैयार हो जायेंगे। पर कहेंगे अपने को बेचारा बलि का बकरा। इन बेचारों की चालाकी देखिये कि अपनी पत्नी के लिये परिचय कराते समय कहेंगे इन से मिलिये ये हैं मेरी धर्मपत्नी। पत्नी तो कभी नहीं कहेगी कि इनसे मिलो ये हैं मेरे धर्मपति। असल में दिल का चोर जुबान पर आ ही जाता है। अब जैसे होता है धर्म भाई, इसका मतलब भाई है पर वास्तव में भाई नहीं है। धर्म बहन इसका मतलब बहन है पर वास्तव में बहन नहीं है। तो क्या धर्म पत्नी कहने में भी यही अर्थ छिपा है कि वे पत्नी है वास्तव में पत्नी नहीं है।
एक पति महोदय अपने आपको ऋतिक रोशन से कम नहीं समझते थे। सुंदर सी साली एक बारात में साथ साथ चल रही थी । उस पर और लड़कों पर रौब गालिब करने के लिये जैसे ही कमर के दो चार झटके लगाये कि बारात में भी फिर आगे कार में गये ओर तीन दिन तक कमर की सिकाई करते रहे।
मुआ, टी.वी. खोलो तो अब तो माटी मिटे लिपटते चिपटते ही दिखें हैं, केश काला तेल के विज्ञापन, असली कालेपन को भी डाॅक्टर के चक्कर लगाते रहेगें, हमारे जमाने में तो एक चुंबन के लिये कितने कितने लुका छिपी के खेल खेलते थे।
ईरानी कहावत है किसी हंसने वाले इंसान के आने से ऐसा लगता है जैसे एक दीपक जल गया हो।
इंकागुअटी थ्योरी के अनुसार तर्क और घटनाऐं जीवन के साधारण ढर्रे से अलग रूप ले लेती हैं, तब हास्य उत्पन्न होता है।