Tuesday, 13 October 2026

ab bacche nahin chahiye

 क मानसिक विकास के लिए आवश्यक है उन्हें खुला बातावरण मिले। अधिक से अधिक  वार्तालाप खेलकूद और आपस में बच्चों के साथ उठना बैठना जरूरी है । पहले संयुक्त परिवार में ही हम उम्र बच्चे मिल जाते थे तब उन्हें हर तरह का पारिवारिक वातावरण मिलता था। मकान भी बड़े होते थे जहां खेलने कूदने के साधन भी रहते थे। एक दूसरे के साथ बांट कर खाना सोना पड़ना होता था।एक दूसरे को देखकर पढ़ते थे। अब अकेला बालक  तो एक कोने में बैठा रील देखता रहता है यही उनका जीवन हो गया है । बचपन का भागना दौड़ना शरीर को मजबूत बना देता है और कम बीमार पड़ता है क्योंकि वह खुली हवा में अधिकांश जीवन व्यतीत करता है। मां बाप को फुरसत नहीं है कि बच्चे पर ध्यान दें वे अपने में व्यस्त हैं। वो कहते हैं हमें भी तो अपना जीवन जीना है इसलिए मां बाप का बंधन ,परिवार का बंधन उन्हें नहीं चाहि

Friday, 2 October 2026

Samay

 आजकल किसी के पास समय नहीं है ,सब भाग रहे हैं,सड़क पर हैं तो इधर उधर कर कैसे भी आगे निकल जाऐं,चाहे नियम ताक पर रखने पड़ें या उनकी वजह से पीछे का ट्रैफिक रुक जाए पर आगे बढ़ाते चले जासेंगे कारण जल्दी है।,समय नहीं है। कुछ समय अपने ऊपर भी दिया करें कहा जाएगा तो जबाव मिलेगा समय कहां है अपने लिए समय ही नहीं मिलता सुबह होते ही भाग दौड़ शुरू हो जाती है।अब तो जब रिटायर होंगे तब अपने लिए समय निकालेंगे पर तब भी समय नहीं होता । शरीर की गति धीमी हो जाती है। एक एक काम में दुगना समय  लगता है 

ध्यान लगाना , अपने को आत्म केन्द्रित करना ,पर ध्यान लगता कहां है , सामने तो तसवीर आ जाती है यह करना है वह करना है,अरे आज यह तो किया ही नहीं,उफ और हो गया ध्यान,वही समय है कि सब कुछ याद आता है। उसी समय तो होश आता है कि हमारी आज की जीवन चर्या क्या है ? या याद आताजाता है विगत ,बीता कल और वही ध्यान का माध्यम बन जाएगा ।

हर व्यक्ति सुख की चाहना करता है आशीर्वाद भी दिया जाएगा कि सदा सुखी रहो ,पर दुःख है कि जरा जरा सी बात में आजाता है और जो सुख है उसे भूलकर दुःख को देखने लगते हैं कि हमारे साथ ऐसा क्यों हुआ?


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