Tuesday, 13 October 2026

ab bacche nahin chahiye

 क मानसिक विकास के लिए आवश्यक है उन्हें खुला बातावरण मिले। अधिक से अधिक  वार्तालाप खेलकूद और आपस में बच्चों के साथ उठना बैठना जरूरी है । पहले संयुक्त परिवार में ही हम उम्र बच्चे मिल जाते थे तब उन्हें हर तरह का पारिवारिक वातावरण मिलता था। मकान भी बड़े होते थे जहां खेलने कूदने के साधन भी रहते थे। एक दूसरे के साथ बांट कर खाना सोना पड़ना होता था।एक दूसरे को देखकर पढ़ते थे। अब अकेला बालक  तो एक कोने में बैठा रील देखता रहता है यही उनका जीवन हो गया है । बचपन का भागना दौड़ना शरीर को मजबूत बना देता है और कम बीमार पड़ता है क्योंकि वह खुली हवा में अधिकांश जीवन व्यतीत करता है। मां बाप को फुरसत नहीं है कि बच्चे पर ध्यान दें वे अपने में व्यस्त हैं। वो कहते हैं हमें भी तो अपना जीवन जीना है इसलिए मां बाप का बंधन ,परिवार का बंधन उन्हें नहीं चाहि

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