Friday, 2 September 2016

आकाश को चूमा

 और उसे एक डलिया से जोड़ दिया एक बकरी डलिया में बिठा दी फिर एक ऊँची मीनार से उ नीचे गिराया, उसके बाद
वह स्वंय एक घर की छत से पैराशूट के माध्यम से कूदा फिर दोनों भाई अनेक प्रयोगो में जुट गये जिसका परिणाम विशाल गुब्बारा था।
       असल में एक कमीज ने गुब्बारे के जन्म के सि(ान्त का प्रतिपादन किया। जोसेफ लेटा हुआ था खूंटी पर लटकी कमीज को हवायें उड़ते देख रहा था। नीचे अंगीठी जल रही थी एकाएक कमीज फूली और धीरे धीरे हवा में उठने लगी। वह और एटनी अपने नई खोज को यथार्थ रूप देने में लग गये। उन्होंने टाफ्ता के कपड़े में गर्म हवा भरी, कागज की थैलियाँ रखी उनके नीचे आग रखी वे उड़ गई। अब एक गुब्बारा बनाया उसे अंगीठी के ऊपर गर्म किया वह उड़ा और 1783 में विशाल एयरोस्टेट का निर्माण किया जिसका प्रदर्शन विशाल जनसमूह के सामने किया। जिसमें प्रथम मनुष्य निर्मित उड़ने वाली वस्तु देखी।

       समाचार यूरोप से अमेरिका में फैला। जंगली आग की तरह दोनों भाइयों की सफलता पश्चिमी सभ्यता को लगी, और दर्जनों परीक्षण प्रारम्भ हो गये।1783 में राबर्ट भाइयों ने जे॰ए॰सी॰ चाल्र्स की देखरेख में गुब्बारा बनाया। चाल्र्स ने गुब्बारे को हाइड्रोजन गैस से भरवाया। गैस को निकालने के लिये वाल्व का निर्माण किया। सर्वप्रथम उन्होंने ही गुब्बारे में एक लूप बनाया जिसमें डलिया लटकाई जा सके। सिल्क के कपड़े पर इलास्टिक गोंद वार्निश की गई थी, इसका पैरा 13 मीटर था। इसको फूलने में तीन दिन लगे, जब यह तैयार हो गया तो एक दम तेजी से तीन हजार फुट की ऊँचाई तक उड़ गया इसका प्रदर्शन पेरिस में बरसते पानी के बीच हुआ। भारी भीड़ पर वर्षा का कोई प्रभाव नही था। गुब्बारा करीब 13 मील दूर एक खेत में जाकर गिर, जहाँ एक अद्भुत वस्तु को आकाश से टपकते देख किसान इतना डर गये कि उन्होंने इसके चिथड़े चिथड़े कर दिये।
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