जमुना किनारे घनश्याम बजावे बासुरिया
मोहित भई सकल बृजवाला
मन में बसे सुघड़ घनश्याम
छोड़ चली सब काम बजावे वंासुरिया
गूजँत धुन मुरली की वन में
राजत छवि बृज वाल कुजंन में
हैरत लै लै नाम बजावे बासुरिया
बैठै श्याम कदम की डारी
शोभा सुन्दर अति मन भाई
देखत सखी तमाम बजावे बांसुरिया
लीला यदुनन्दन की न्यारी
भये रघुनाथ चरणा बलिहारी
भजमन आठो याम बजावे बांसुरिया
122जल कैसे वो भरू जमुना गहरी जल कैसे वो भरू
गोकुल जी से चली रे गुजरिया रामा
हाथ गड़रूआ सिर गगरी हरी
नौहर मंसू श्री श्याम तकत है रामा
बैठ मंसू भीजे चुदरी हरि हर भीजे चुदरी जल
होले चलू घर सास लड़ेगी रामा
जल्दी चली छनके गगरी हरी हर झलके गगरी
123
मेरे नाथ का नाम दयानिधि है वो दया ही करेगें कभी न कभी
वंशी भी सुनेंगें कभी न कभी दरशन भी देगें कभी न कभी
मेरे नाथ है सारे अनाथो का धन सब छोड़ के इनसे लगा अपना मन
अब आन न पड़े तू इनकी शरणा तेरी हरी सुनेगें कभी न कभी
निज भक्तों को आप उबारा किये उन्हें भव सागर से भी तारा
मेरे नाथ भरोसा मेरा भी है उद्वार करेगें कभी न कभी
घर द्वार पे इनको पुकारा किये पर इनका नही कही है पता
ये छोड़ के लाख छिपेगें कही इन्हें ढूढ ही लेगें कही न कही
ये तो केवट है भव सागर के सबको ही पार लगाते हैं
मेरी नाव भवर में आन पड़ी इसे पार करेगें कभी न कभी
मै तो बैठा हूँ राह को भूला हुआ बड़ी देर से इनको पुकार रहा
मुझे आशा है भाग के आयेगें वो जब हरि सुनेगें कभी न कभी
संसार से नाता सब तोड़ो और इनके ही चरणों में आन पड़ो
मन प्रेम से राधे श्याम भजो हरि आप सुनेगें कभी न कभी
124विनय कँरू सिर नाच चतुभुर्ज दीजे दरश दिखाय
झीर समुद्र सैन करैया शेषनाम की तुम्हारी शैया
लक्ष्मी दावे चरणा चुतुभुर्ज दीजे दिखाय
सिर पर मुकुट कान में कुण्डल केशर तिलक लगाय
नीलाम्वर पीताम्वर ओहे गल बैजन्ती माल
चतुभुर्ज दीजे दरश दिखाय
नाभि कुण्ड बह्ना उपजाये सारी सृष्टि आप रचाये
उर नर मुनि बलिहार चतुभुर्ज दीजे दरश दिखाय
वासुदेव श्री हरि बनवारी हरहु नाथ मम संकट भारी
दीजे दरश दिखाय चतुभुर्ज दीजे दरश दिखाय
124तू टेड़ो तेरी टेड़ी गागरिया
तू टेड़ो है नन्द बाबा को में टेड़ी वृषमान दुलरिया
टेड़ो ही टेड़ो मोर मुकुट है मेरी तो टेड़ी लाल सिर की इडुरिया
टेड़ो ही टेड़ो पंच रंग पेचों मेरी तो टेड़ी लाल सुरख चुनरिया
जमुना भी टेड़ी टेड़ी कलंगी टेडी गोकुल की नागरिया
चन्द्र सखी भज वाल कृष्णा छवि चिरजीवी रहो श्याम सुन्दरिया
125हीरा मन तोता उड़ जायेगा
इन दूधों का गर्व न कीजे दूध विलैया पी जायेगी
हीरा मन तोता उड़ जायेगा
इन धीयो का गर्वन कीजे धीय जमइया ले जायेगा
हीरा मन तोता उड़ जायेगा
इन पूतों का गर्व न कीजे पूत पड़ोसी हो जायेगा
हीरा मन तोता उड़ जायेगा
126
कहाँ जा छुपे हो प्यारे कन्हैया
यहाँ लाज मेरी लुटी जा रही है
दुशासन के हाथो तेरी द्रोपदी की
सभा बीच साड़ी खिची जा रही है
जिन्होने कभी मेरी सूरत न देखी
के देखेगें नंगा वदन आज मेरा
जुये में पति मेरे हारे है बाजी
यह महलों की रानी लुटी जा रही है
कहाँ जा छुपे हो प्यारे कन्हैया
जिन्हें लोग कहते थे वीरो के राजा
अरे झुकता सारा जहाँ जिनके आगे
वो देखो समय कैसा बदला हुआ है
वीरो की गर्दन झुकी जा रही है
कहाँ जा छुपे हो प्यारे कन्हैया
गुरू द्रोण बोलो पितामाह बोलो
ये तुमसे तुम्हारी बहू पूछती है
सभा में क्यों साड़ी खिंचवा रहे हो
कहो कुछ जुवा क्या घिसी जा रही है
कहाँ जा छुपे हो प्यारे कन्हैया
अरे कोई सुनता है यहाँ पर न मेरी
बुलाती है भैया बहन तुझको तेरी
अगर देर सुन कर न आये मुरारी
तेरी शान सारी घटी जा रही है
कहाँ जा छुपे हो प्यारे कन्हैया
खिंचा चीर जब ना दुःशासन था हारा
मैं समझी थी भगवन तुम्हारा इशारा
कि साड़ी के हर तार में तुम समाये
इसी से ये साड़ी ख्ंिाची जा रही है
कहाँ जा छुपे हो प्यारे कन्हैया
127
देख री एक वाला जोगी द्वार हमारे आया है री
वाघम्वर को ओढ़ दुशाला शेष नाग लपटाया है री
माथे माल तिलक चन्द्रमा मोतियन माल पहने है री
जा योगी अपने आश्रम को मेरा लाला डराया है री
ना चाहिये तेरे हीरा मोती न चािहये तेरी माया है री
तेरे लाला के दाश दिखा साधू काशी से आया है री
ले बालक निकली नन्द रानी योगी दर्शन पाया है री
सात वेर परिकम्मा करके सिगी नाद बजाया है री
सूरदास बैकुण्ठ धाम में धन्य जशोमति मम्या है री
तीन लोक के कर्त्ता धर्त्ता तेरी गोदी आया है री
128
आज ठाड़ो री बिहारी यमुना तट पै
मत जइयो री अकेली कोई पनघट पर
मुकुट लटक भृकुटि की मटक
मन ग्योरी अटक कटि पीरो पट पे
नन्द जू को होना लखि धीरज धरो न
वीर ऐसो कछू टोना नटवर नट पे
आज ठाड़ो री बिहारी यमुना तट पै
गुरूजन वास कैसे बसे बृजवास
मन वन गयो दास घुघंरावली लट पे
आज ठाड़ो री बिहारी यमुना तट पै
छुटी कुल लाज गोपी आई आज भाज
रास रसिया को रास आज वंशीवट पे
आज ठाड़ो री बिहारी यमुना तट पै
129
जब से घनश्याम इस दिल में आने लगे
क्या कहे रंग क्या क्या दिखाने लगे
आये यूहिं जो एक दिन टहलते हुये
कुछ झिझकते हुये कुछ सम्हलते हुये
चुपके चुपके से दिल ले के चलते हुये
मैंने पकड़ा जो बाहर निकलते हुये
मोहिनी डाल कर मुस्कराने लगे क्या कहे रग क्या
एक दिन उनके आने का बतलाऊ
आ गये जेव में ही लगाकर नकब
बाँधकर ले चले मानो दिल माल सब
मैने देखा वो पूछा कि यह क्या गजब
कुछ मचल कर के मुरली बजाने लगे
क्या कहे रंग क्या क्या दिखाने लगे
एक दिन ख्याव में ही खड़े आप हैं
दिल उड़ाने की धुन में अड़े आप हैं
मैं बोला कि हजरत बड़े आप हैं
क्यों मेरे दिल के पीछे पड़े आप हैं
चोट चितवन की दिल पर चलाने लगे
इक दिन आप आये तो इस तौर से
दर्द दिल बाके दिल में उठा जोर से
देखा उन्हें जब बड़े गोर से
माँगते फिर न आये किसी और से
वन गये बिन्दु आँखों से जाने लगे
तब से धनश्याम दिल में समाने लगे
130
वेद्य वन कर के गोकुल से कान्हा चले
गाँव बरसाने आना गजब हो गया
जड़ी बूटी से झोली भरी श्याम में
उसमें वशी बजाना गजब हो गया
श्याम गलियों में आकर लगाई आवाज
कोई बीमार है आ गये वेद जी
हम तो दुखियों के देते मुफ्त बूटियाँ
बोली ऐसी सुनाना गजब हो गया
आवाज दे के ललिता ने लीन्हो बुलाय
बड़े आदर से चौकी पे दीन्हे बैठाय
वेद्यजी देख लेना नवज को जरा
दिल मचलता कमर दर्द सिर दर्द है
ओर ओसर गवाना गजब हो गया
हंस के बोले श्याम रोज कुछ भी नही
हम तो पल भर में करते हैं सब दुख दूर
नैन कजरा लगा के गई हो कहीं
लड़ गये नैन से नैन जाकर कहीं
बोली ऐसी सुनाना गजब हो गया
दिल दुखाना किसी का गजब हो गया ☺
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