Saturday, 26 September 2026

Horla 2

 6 जुलाई , मैं पागल हो रहा हूँ फिर मेरी बोतल का पानी रात में कोई पी गया । कौन हो सकता है? हे ईश्वर! मुझे कौन बचायेगा ?

6 जुलाई को बिस्तर पर जाने से पहले मैंने जरा सी शराब, दूध, पानी, बै्रड और कुछ स्ट्रोबरी अपनी मेज पर रखदीं ,लेकिन कोई सारा पानी पी गया  ,थोड़ा सा दूध, लेकिन शराब ब्रैड और स्ट्रोबरी को छुआ भी नही।

7 जुलाई को भी वही अनुभव दोबारा हुआ और आठ जुलाई को मैंने पानी और दूध नहीं रखा, कुछ भी नहीं छुआ गया।

अंत में नौ जुलाई केा मैने केवल दूध और पानी मेज पर रखा, मैंने बोतल को सफेद मलमल के कपड़े में लपेट दिया और अपने हाथ अपने होठ अपनी दाढ़ी को पेंसिंल के बुरादे से मल लिया और सो गया।

गहरी नींद ने मुझे आगोश में ले लिया ओर चौक कर जागा। मैं हिला भी नहीं चादर पर पेंसिंल के बुरादे का कोई निशान नहीं था । मैं मेज पर गया मलमल का कपड़ा ढक्कन पर कसकर बंधा था। मैंने डोरी खोली, मैं भय से कांप उठा, सारा पानी पी लिया गया था और दूध भी ! आह दिव्य ईश्वर तुम दिव्य हो मुझे शीघ्र ही पेरिस चले जाना चाहिये।

12 जुलाई,  पेरिस  चौबीस घंटे में ही मेरे दिमाग को शांत कर देगा। कल कुछ व्यापारिक काम और लोगों से मिलकर कुछ अच्छा लगा, जैसे मेरी आत्मा को शीतल हवा मिल गयी । मैंने शाम प्रांसिस नाटक घर में बिताई। अलैक्जेन्डर ड्यूमास के अभिनय और कल्पना शक्ति ने मुझे पूरी तरह ठीक कर दिया। शायद एकाकीपन दिमाग के लिये बहुत खतरनाक है

14 जुलाई , स्वाधीनता दिवस के जलूस में सड़कों पर बच्चों की तरह खुश होता आतिशबाजी और झंडे देखता चल रहा हूँ ,वैसे सरकारी तौर पर एक निश्चित दिवस पर खुश होना कहाँ की समझदारी है ? भेड़ो के झुंड की तरह भीड़ चल रही है ,अभी विद्रोह में बदल सकता है । हम ऐसे ही है ,खुश हो जाओ तो खुश हो जायेंगे । अगर कोई कहेगा जाओ पड़ोसी से लड़ो, तो लड़ने लगेंगे ,कहेगे सम्राट को वोट देा तो सम्राट केा वोट दे देंग,े अगर कहेंगे जनता को वोट दो जनता केा दे देंगे।

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16 जुलाई , मैंने कुछ देखा वह मुझे बहुत परेशान कर रहा है । मैं अपनी चचेरी बहन मैंडम सबले के यहां गया वहॉं डा॰ पेरेन्ट जो स्नायुतंत्र विशेषज्ञ है वशीकरण द्वारा रोग का निदान करते हैं से मिला।

हमे उसने प्रकृति के रहस्य की ओर इंगित करते हुए कहा ,‘  जबसे मनुष्य ने सोचना प्रारम्भ किया, अपने को रहस्यों से घिरा पाया है जिन्हें वह बता नहीं पाता।

जब तक बुद्धि प्रारम्भिक अवस्था में होती है अदृश्य आत्माऐं उसके चारों और घूमती रहती है। जब वे उन्हें महसूस करने लगता है तब अलौकिक शक्ति का एहसास होता है। तब परियाँ, बौने भूत-प्रेत मैं कहूॅं तो भगवान का आस्तित्व ,वह किसी भी धर्म से आया ,सतही लेकिन बहुत ही वेबकूफी भरा अविश्वासनीय आविष्कार मनुष्य के दिमाग में उत्पन्न हुआ । बाल्तेयर ने कहा है, वह सत्य है भगवान ने मानव अपनी कल्पना से बनाया लेकिन मानव ने वापस भगवान को अपने सिक्के में ढाल लिया। मैसमर और कुछ अन्य व्यक्तियों ने हमें अलग रास्ते पर डाल दिया है । मेरी बहन जो जरा सहज ही विश्वास नहीं करती मुस्कराई डॉ॰ पेरेंट उससे बोले,‘ ‘क्या आपको मैं नींद की अवस्था में पहुंचा दूँ मैडम’

‘हाँ, अवश्य ।’

वह एक आराम कुर्सी पर बैठ गई डॉ॰ उसकी आंखों में एकटक देखने लगा। मैने देखा मैडम सबले की आंखों भारी होने लगी , दस मिनट में वह सो गई । ‘उसके पीछे जाओ,’ डाक्टर ने मुझसे कहा मैं उसके पीछे चला गया डाक्टर ने एक विजिटर कार्ड उसके हाथ मे दिया,‘ यह एक दर्पण है तुम्हें इसके अंदर क्या दिखाई देता है ? 

‘वह हाथ के सफेद कागज को ऐसे देख रही थी जैसे दर्पण हो।  डाक्टर ने मैडम सेबल से कहा ,‘जब तुम आठ बजे सुबह उठोगी , चचाजाद भाई को अपने होटल में बुलाओगी उससे 5 हजार फ्रैंक मांगोगी  जो तुम से तुम्हारा पति मांगेगा । ’

फिर उसने उसे जगा दिया । अपने होटल लौट कर मैं सोने चला गया और  सुबह करीब साढ़े आठ बजे मुझे मेरे नौकर ने जागाया उसने कहा, ‘मैडम सबले आप से तुरंत मिलना चाहती है।’

मैं जल्दी से तैयार हुआ और उसके पास गया।

वह कुछ चिढ़ी सी बैठी थी ।  उसने चेहरे से जालीदार आवरण हटाये बिना कहा, ‘भाई मुझे तुम्हारा सहयोग चाहिये।’

‘क्या?’

‘मैं बताना तो नहीं चाहती पर बताना पड़ा ,मुझे पंांच हजार फ्रैंक चाहिये।’

मै हकला उठा ,मुझे लगा कहीं वो मुझे डॉ॰ पेरेंट से मिलकर वेबकूफ तो नहीं बना रही है ।  उसे ध्यान से देखने पर मेरा शक उड़ गया । वह दुःख से कांप रही थी । मैं जानता था कि वह बहुत अमीर है । मैंने कहना जारी रखा,‘क्या तुम्हारे पति के पास पांच हजार फ्रैंक नहीं है ’ ।वह एक क्षण हिचकिचाई जैसे कुछ याद करने की कोशिश कर रही हो, तब बोली ,‘हाँ निश्चय ही उसने लिखा भी था।’


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