एक बार आपने बच्चे को मोबाइल की लत डाल दी फिर आपको होश आता है कि बच्चा हर समय मोबाइल देखने में व्यस्त है रात में भी मोबाइल चादर या रजाई के अंदर रखकर उसे ढककर देखता रहता है। आप मोबाइल छीनने और डांटने डपटने लगते हैं। पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। स्वयं अपने व्यवहार को देएक बार आपने बच्चे को मोबाइल की लत डाल दी फिर आपको होश आता है कि बच्चा हर समय मोबाइल खिये किआप कितनी देर मोबाइल में आंख गड़ाये रहते हैं,बच्चे का समय लीजिये और अपना दीजिये । अपने साथ छोटे छोटे कामों में व्यस्त करिये। हर काम में उसकी भागीदारी रहे उससे बात करें । कुछ समय उसके साथ खेलें एक साथ बैठें उठें। उसे लगना वाहिये िकवह घर का सदस्य है।स्वयं मोबाइल पर से आंख कम करें तब ही बचचे को समझ में आयेगी । अपनी आंखें मोबाइल पर,उंगलियां मोबाइल पर रखते हुए दूसरे हाथ से बच्चे से मोबाइल छीनने का प्रयास करने से बच्चा विद्रोही हो जायेगा। आपकी बात नहीं मानेगा । अधिक रोका राकी करने से वह अनुचित कदम उठा लेगा। इन सबसे बचने के लिए आवश्यक है स्वयं पर भी नियंत्रण रखें अगर हो सके तो परिवार में रहें बच्चे को तरह तरह से व्यस्त रखते हैं । कहानी सुनाकर या अन्य बच्चों के साथ खेलने जाकर।। उनका अकेलापन कम होगा । नौकर नौकरानी पर बच्चों को छोड़न्ेा की बजाय मां बाप को साथ रखें। नौकर नौकरानी के लिये वे केवल एक काम का हिस्सा हैं पर मां बाप दादा दादी नाना नानी के लिए वे उनके जीवन का हिस्सा हैं। सेवकों के लिसे काम का अतिरिक्त बोझ हैं तो मांबाप के लिए सूद जो मूल से अधिक प्यारा होता है ।
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