Wednesday, 16 December 2015

देशी में विदेशी तड़का

चटनी है रोटी खवईयों पर मोय बलाइवै आइयो

मतलब जिसकी कोई अहमियत नहीं बेचारी चटनी नमक के बाद चटनी ही एक ऐसी चीज थी जो सर्व सुलभ थी किसी भी चीज को पीस कर नमक मिर्च के साथ पेश कर दो चाहे धनिये की डंडियों और पालक की ढेर सारी डंडी सहित मिर्च के साथ पीस दो चाहे समोसे हो चाहे कचैड़ी चाहे गोलगप्पे सब स्वाद ले लेकर चाट जायेंगे

लेकिन उसको मिलेगा सर्वहार का स्थान लेकिन यही चटनी अंग्रेजी में डिप बनकर नायाब चीज हो गई है।

अंग्रेजी का एक तो कहीं भी लग जाये उसका महत्व एकदम बढ़ जाता है वैदिक काल से चला आ रहा योग अभी तब किताबों या मेले ठेले मे आने वाले साधुओं के पास था एकाएक ग्लोबल हो गया

हां जी ग्लोबल से बात वजन बढ़ता है वैश्विक तो ऐसा लगता हे मानो विदेशी को उसी के देश में देशी कह दिया हो जब कि ग्लोबल कहने मे ऐसा लगता है
अमेरिका में भारतीय को फाॅरनर कह दो तो उसकी अहमियत बढ़ जाती है। भारतीय सामान जब दस गुने दाम के साथ विदेशी से आता है तब उसकी कीमत एमदम बढ़ जाती है तब गली मुहल्ले में वह फाॅरनर का सामान होता है।

राम रामा कृष्ण कृष्णा बुद्ध बुद्धा बनकर एकाएक बहुत महत्वपूर्ण बनकर विदेशों में भी पहुंच गये हे जहां-जहां भारतीय पहुंचा है बिना मंदिर के काम चलता नहीं है पर उसके साथ अंग्रेजी का एक तो जुड़ेगा तब ही वह आधुनिक होगा। राम को राम कहने से उसकी आधुनिकता या कहना न होगा अंग्रेजियत में फर्क आ जायेगा भरी सभा में पार्टी सू-सू कहने में जबान जरा भी नही हिचकेगी


जबकि हगना-मूतना कहते ही खाना बाहर आ जायेगा और बाथरूम की ओर भागेगा चाहे उस समय व नहाने तो जायेगा नहीं पर कुछ भी करना हो जायेगा वो बाथरूम ही।

कुत्ते को कुत्ता मत कहना हां डागी कहने से वह बुरा नहीं मानेगा समझे न छाॅक चाहे राई का लगाओ या जीरे का सब्जीसब्जी जो भी डालो ढककर बनाना डालना पत्तागोभी बताना सैलेरी तब ही इज्जत बनी रहेगी नहीं तो देशी बनकर ही रह जाओंगे।

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