Wednesday, 13 January 2016

और ताजमहल बिक गया

रामू अखबार उठा कर लाया तो सामने ही उस पर ताजमहल की तस्वीर देख प्रसन्न हो उठा। उसके साहब के बंगले से ताजमहल एकदम साफ दिखाई देता था। खाली समय या चांदनी रात में ताजमहल को देखकर वह बहुत प्रसन्न होता था।


शरत् पूर्णिमा पर तीन दिन तक ताजमहल के आसपास सिर ही सिर रात में दिखाई देते। जोर से आवाजें लगतीं चमकी ,अब क्या चमका ? हाॅं किसी सुंदरी का चेहरा


एक तरफ तो उसे मेला सा लगता ,दूसरी तरफ खीज भी होती क्योंकि साहब के मिलने वाले भी बहुत आते थे। रात में ताजमहल देखेंगे। साहब के घर से ही ताजमहल दिखता है, ऊपर से साहब तो बस साहब हैं ही जनता से ताजमहल के रख-रखाव के पैसे वसूले जायेंगे कोई बपौती उनकी तो है नहीं वो रात में अंदर फाटक में भी नहीं जा सकते, चाहे कितना ही पैसा दें,


हाँ साहब के आगे तो सरकारी बिल्ला लग गया बस फिर क्या है, बपौती तो अब उनकी है बिना पैसे दिये धड़ाधड़ शान से सर्राटे से गाड़ी अंदर जाती है।


एक दो बार वह भी साहब के साथ अंदर गया था। बाहर खड़ी भीड़ बड़े रश्क से उन्हें देख रही थी, उसी ताजमहल की फोटो अखबार में देख वह साहब से बाला, साहब, ये अपने ताजमहल की फोटू अखबार में क्यों आई है ? साहब ने अखबार पर एक नजर डाली और कहा, ‘ताजमहल कारखानों के धुएँ से काला हो रहा है इसलिये उसे किसी प्रकार बचाने के लिये सोचा जा रहा है।

 अच्छा, साहब ताजमहल तौ बहुत पैसों से बना होगा ? ‘हाँ भई ,अब तुम्हें क्या बताऊँ, अब ताजमहल बनाने के लिए ये कमरा हजार हजार के नोटों से भर जाये तब भी बन पायेगा या नहीं, नहीं कहा जा सकता।


 ‘तौ सरकार का करैगी, साहब

 कुछ नहीं अमेरिका से लोग आयेंगे तब कुछ होगा

अच्छा चेहरे पर आश्चर्य के भाव और उदासी लिये रामू घर के कामों में व्यस्त हो गया।
 दोपहर खाली समय में सब बंगलों के नौकर पार्क में बैठकर अपने अपने साहब मैमसाहबों की कहानियाँ चटखारे ले ले सुनाते। रामू के दिमाग मे तो सुबह से ताजमहल घूम रहा था, वह बोला, पता है अब यह ताजमहल काला हो जायेगा।


 ऐं, काला...क्या कह रहा है रामू...काला कैसे हो जायेगा।
मेरे साहब ने अखबार में पढ़कर बताया कि ताजमहल काला हो रहा है, इसे बचा तो पा नहीं रही है। सरकार, शायद बेचनेकी बात कह रहे थे।


 ‘बिक जायेगा, कोई बहुत पैेसे वाला ही लोगा। मुन्ना ने कहा, ‘हां कोई बाहर से रहा है इसको देखने रामू ने जानकारी दी। साहब ने उसे यह भी बताया था कि इसको देखने, अमेरिका से एक दल आयेगा।


 ‘हाँ भई , पैसे भी तो, बहुत रुपयों में बिकेगा, मेरे साहब कह रहे थे,’
 इसके लिए कट्टा भर के हजार हजार के नौट मांगेगे, इत्ते पैसे तो कोई बाहर का आदमी ही दे सकता है।रामू ने सिर हिलाते हुए कहा।

और ताजमहल बिक गया:अगला  भाग

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